Microbiology-Virus
General Science For All Competitive Exam’s Most Trending Topic Microbiology – Virus (Virology)
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ToggleMicrobiology – Virus -विज्ञान की वह शाखा जिसमें वायरस / विषाणु का अध्ययन किया जाता है वायरस विज्ञान कहलाता है | वायरस शब्द दो लैटिन शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है तरल विष | सबसे पहले वायरस की खोज इवानोविस्की ने तम्बाकू के पौधे में की थी और उसे TMV नाम दिया था (तम्बाकू मोजेक वायरस ) यह वायरस तम्बाकू के पौधे में मोजेक नामक रोग उत्पन्न करता था | जिससे तम्बाकू की पत्तियों में छिद्र हो जाते थे | इवानोविस्की ने देखा की जब तम्बाकू की संक्रमित पत्तियों को पीस कर उसका घोल अन्य पौधों की पत्तियों पर छिड़का जाता है तो वे भी संक्रमित हो जाती है | Microbiology – Virus वायरस सजीवों के अंदर सजीव के रूप में रहता है | और जब यह सजीव के शरीर से बाहर निकल जाता है तो यह निर्जीव अवस्था में पाया जाता है | इसलिए इसे सजीवों एवं निर्जीवों के बीच की योजक कड़ी कहते है |
वायरस जनन की क्रिया केवल सजीव के शरीर के अंदर करता है | यह निर्जीव अवस्था जैसे – पानी , वायु , मिट्टी आदि में जनन की क्रिया नहीं करता है | ध्यान रहे निर्जीव अवस्था में यह मरता नही है | और यह लाखों वर्षो तक निर्जीव अवस्था में रह सकता है |
difference between computer virus and Microbiology virus
कंप्यूटर वायरस एक प्रोग्राम फाइल होती है जो हमारे कंप्यूटर के डाटा को नष्ट कर सकता है | यह हमारे कंप्यूटर में तब आता है जब हम इन्टरनेट से कोई फाइल डाउनलोड करते है | लेकिन माइक्रोबायोलॉजिकल वायरस एक जीव है | जो सजीव के अंदर संक्रमण उत्पन्न करता है | जिससे सजीव (पादप या जन्तु) का स्वास्थ्य ख़राब हो जाता है |
महत्वपूर्ण बिंदु –
- इसकी खोज इवानोविस्की ने की थी |
- वैज्ञानिक इवानोविस्की ने विषाणु की खोज मोजेक रोग का अध्ययन करते समय तम्बाकू के पौधे में की थी |
- वायरस अकोशिकीय संरचना है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोशिकीय संरचना या कोशिकांग नहीं पाए जाते है इस लिए वायरस कोशिकीय सिद्धांत का अपवाद है |
- वायरस को सजीव एवं निर्जीव के बीच की योजक कड़ी माना जाता है क्योंकि परपोषी के शरीर के अंदर ही सजीवों के समान लक्षण दर्शाता है जबकि परपोषी के शरीर के बाहर ये निर्जीव कण के समान पाया जाता है |
- स्टेनले ने सर्वप्रथम वायरस को परपोषी के बाहर क्रिस्टलीय रूप में प्राप्त किया था |
- बेजेरिनेक ने वायरस को “संक्रामक जीवित तरल” या कन्टेजियम वाइमन फ्ल्युडम कहते है |
- लॉफलर एवं फ़ॉश इन्होने वायरस नाम दिया था |
- वायरस का बाहरी आवरण मुख्य रूप में प्रोटीन से बना होता है लेकिन प्रोटीन के अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट एवं वसा भी हो सकती है |
- वायरस का यह आवरण कैप्सिड कहलाता है, जिसमें छोटी इकाइयाँ कैप्सोमीयर्स कहलाती है |
- कैप्सिड आवरण के अन्दर न्यूक्लिक अम्ल उपस्थित है जो या तो डीएनए या RNA हो सकता है अर्थात् दोनों में से कोई एक होगा दोनों एक साथ नहीं होते है |
- वे वायरस जिनमें RNA उपस्थित होता है RNA वायरस / रिट्रो वायरस कहलाता है |
- वे वायरस जिनमें डीएनए उपस्थित होता है उन्हें डीएनए वायरस कहते है |
- माइकोफेज वायरस :- ये कवकों को संक्रमित करने वाले वायरस है |
- फाइकोफेज वायरस :- ये शैवालों के संक्रमित करते है |
- बैक्टीरियोफेज वायरस :- ये जीवाणुओं को संक्रमित करते है | गंगा नदी के पानी में ये पाए जाते है |
- एक्टीनोफेज वायरस :- ये एकिनोमाइसिटिज को संक्रमित करते है |
- जाइमोफेज वायरस :- ये यीस्ट को संक्रमित करते है |
- सायनोफेज वायरस :- ये नील हरित शैवाल को संक्रमित करते है |
- वाइरॉइड :- प्रोटीन आवरण रहित RNA के कण, जो रोग उत्पन्न करने में सक्षम होते है इनकी खोज T.O. डाईनर ने की थी ये पोटेटो में स्पिन्डल ट्यूमर रोग उत्पन्न करते है |
- प्रिऑन :- संक्रामक प्रोटीन कण जिनमें न्यूक्लिक अम्ल नहीं पाया जाता है | ये मेड काऊ रोग, स्क्रेपी रोग उत्पन्न करते है |
- विरिऑन :- परपोषी / Host cell कोशिका के बाहर वायरस की संक्रामक अवस्था है |
Microbiology – Virus / वायरस के महत्त्व : –
लाभदायक उपयोग :-
जीवाणुओं और शैवालो की वृद्धि को रोकता है जैसे:- बैक्टीरियोफेज व फाइकोफेज |
आनुवंशिकी के प्रयोग में :- बैक्टीरियोफेज वायरस की सहायता से ही ये पता चला कि डीएनए हमारा आनुवंशिक पदार्थ है |
वैक्सीन / टीका निर्माण में :- निष्क्रिय या रोग क्षमता रहित वायरस टीका बनाने में उपयोग किया जाता है |
हानिकारक प्रभाव :-
जन्तु एवं पादपों में रोग उत्पन्न करते है |
जैविक हथियारों के रूप में |
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